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Wednesday, May 05, 2010

मेरी कहानी


दोस्तों ,
                आपका  स्वागत  है  मेरे  ब्लॉग  में | मैं  इसबार  आपको  बताने  जा  रहा  हूँ  मेरे  NPTN  की  कहानी , मेरे  डिप्लोमा  की  कहानी , मेरे  तीन साल  की  कहानी | तो   गौर से  सुनियेगा  मैं  ब्लॉग  पे  सुनाता  हूँ |
       बात  सन  २००७  के  ग्रीष्मकालीन  छुट्टियों  की  है , मैं  SSC की एक्साम्स  देकर  आराम  फरमा  रहा  था  तो सोच  में  डूबा  था  की  "मुझे  Future में  क्या  बनना  है ?". मेरे  सब  दोस्तोंने  पहले  से  सोच  रखा  था की  करेंगे  क्या  वही  रास्ता  अपनाएंगे  जो  ज्यादातर  लोगों  ने  अपनाया  है , याने  की  वो  11th में  admission  लेके , HSC कर  के , PMT(Pre-Medical-Test) या  PET(Pre-Engineering-Test) देना  चाहते  थे | पर  मैं  कुछ  अलग  था , मुझे  वही  बोरिंग  Physics, Chemistry और  Biology जैसे  Subjects  से सख्त  नफरत  हो  चुकी  थी | पर  सोच  रहा  था  की  यही  subjects   छोड़  दूंगा , तो  पढूंगा  क्या  History, Geography | इसी  विचार  में  मेरी बहुत  सी छुट्टियां  निकल  गयी | मैं  सोच  रहा  था  की  मुझे  क्या  करना  चाहिए ? क्या  बनना  चाहिए ? आखिर  यही  तो  वक़्त  होता  है  सोचने  का |
                मैंने  सोचा  की  वैसे  भी  नहीं  तो  भी  11th,12th में  admission लेके , वही  पकेले  subject पढ़-पढ़  के , practicals  कर-कर  के  बोर  हो  जाऊँगा | आगे  जाकर   तो  मुझे  कंप्यूटर  इंजीनियरिंग  याने  बी .इ . ही  करना  है . तो  क्यूँ    यहीं  के  लोकल  N.P.T.N. में  admission लेके  कंप्यूटर  के  subjects में  ही  सर  खपाया जाए | वैसे  तब , मुझे  लग  रहा  था  की  मैं  कंप्यूटर  में  बहुत  intelligent   हूँ , शायद  ही  कोई  और  उस  कॉलेज  में  मेरी  intelligency को  मात  दे  पाए , और  मेरा  हरदम  पहला  नंबर  आएगा | पर  दोस्तों , सचाई  ठीक  इस्सके  उलट  थी , वहां  पे  सिर्फ  कंप्यूटर  ओपरेटर की  पढाई  नहीं  बल्कि  कंप्यूटर  इंजीनियरिंग  की  पढाई  होनी  थी |
                मैंने  सोचा  की  वैसे  भी  नहीं  तो  भी  11th,12th में  admission लेके , वही  पकेले  subject पढ़-पढ़  के , practicals  कर-कर  के  बोर  हो  जाऊँगा | आगे  जाकर   तो  मुझे  कंप्यूटर  इंजीनियरिंग  याने  बी . . ही  करना  है . तो  क्यूँ    यहीं  के  लोकल  N.P.T.N. में  admission लेके  कंप्यूटर  के  subjects में  ही  सर  खपाया जाए | वैसे  तब , मुझे  लग  रहा  था  की  मैं  कंप्यूटर  में  बहुत  intelligent   हूँ , शायद  ही  कोई  और  उस  कॉलेज  में  मेरी  intelligency को  मात  दे  पाए , और  मेरा  हरदम  पहला  नंबर  आएगा | पर  दोस्तों , सचाई  ठीक  इस्सके  उलट  थी , वहां  पे  सिर्फ  कंप्यूटर  ओपरेटर   की  पढाई  नहीं  बल्कि  कंप्यूटर  इंजीनियरिंग  की  पढाई  होनी  थी |
 First Semester =>
डिप्लोमा  का  First Semester तो  कंप्यूटर  फिल्ड  समझने  में , नए  दोस्त  बनाने  और  मेरी  समझ  को  झुठलाने  में  ही  गुजर  गया | मैंने  सोचा  था  की ,  Biology|Physics|Chemistry subjects को  मैं पीछे  छोड़  आया  हूँ | पर  यह  क्या  यहाँ  मैंने  पाया  की  1st Sem. में   यह  subjects  कम्पलसरी  है | वैसे  मेरे  काफी  दोस्तों  ने  इस  का  इलाज़  याने  की  'Tution " ढून्ढ  लिया  था | पर  मैं  सोचता  था  की  SSC तक  इतनी   सारे  tuitions लगा  कर  में  थक  चूका  हूँ  और  वैसे  भी  कॉलेज  के  lectures और  घर  पर  पढाई  कर  के  मैं  अच्छा  स्कोर कर सकता  हूँ  | यही  सोच  के  मैंने , Basic Chemistry, Basic Physics, और  Basic Maths की  tuition लगाना  ज़रूरी  नहीं  समझा | पर  अफ़सोस   , मैं  गलत  था , कॉलेज  में  इतना  कम  syllabus हुआ , और  जो  हुआ  उसमें   भी  कुछ  समझ  नहीं  आया , की  मुझे  1st Semester के  low results देखकर  इसका  अंजाम  बुघतना  पड़ा | वैसे , मैंने  half-sem होने  के  बाद  maths  की  tuiton लगा  ली  थी |



सकारात्मक पहलु:
  •  नए  दोस्त  बनाये
  •   कंप्यूटर  ओपरेट  करना  और  कंप्यूटर  इंजिनियर  बनना , इन  दो  चीजों  में  बहुत  फर्क  होता  है  यह
      जाना
  •   Basic Physics (34/80) और  Basic Chemistry (30/80) में  बाल - बाल  बचा . कम से कम 28/80 चाहिए  थे    


नकारात्मक पहलु:
  • पुराने  कई  दोस्त  खोये 
  • Percentage  कम  (69.68%) आने  की  वजह  से  निराश




                पापा  का  नाम  -


                                एक  किस्सा  first semester का मैं  आपको  ज़रूर  सुनाना  चाहूँगा | पहला  ही  दिन  था  कॉलेज  में  पढाई  शुरू  होने  का , Physics के  सर  आये  और  उन्होंने  सब  का  introduction  लिया | उन्होंने  कुछ  सिखाने  की  लिए , ब्लैकबोर्ड  पे  कुछ  लिखना  शुरू  किया | पहला  दिन  होने  की  वजह  से  मैं  और  बाकी  सब  मस्ती के  मूड  में  थे , और  तो  और  मुझे  बोर्ड  पे लिखा हुआ  सर  की  वजह  से  दिखाई  नहीं  दे  रहा  था , इस वजह  से  मैंने  लिखना  मुनासिब  नहीं  समझा | और मैंने  दोस्तों के साथ  बातें  करना  शुरू  कर  दिया | फर्स्ट  डेस्क  पर ही  बैठा  होने  की  वजह  से , यह  सर  की  कानों  में  पड़ी , और  पहले  ही  दिन, अपनी  Strictness बताने  की  लिए, मुझे  और मेरे  एक  दोस्त  मनीष  को  क्लास  के  बहार  कर  दिया गया | कुछ  देर  गुजरी , एक  टॉपिक ख़त्म  होने  के  बाद  सर  बहार  आये  और नाम  पूछ  के  प्रिंसिपल  सर  के  पास  पहुंचे | Principal  sir  मेरे  पापा  को  जानते  थे , दरअसल  मेरे  पापा  Municipal Council में  इंजिनियर  है , और  N.P.T.N. भी  Municipal Council के  अंडर  में  आता  है  | कुछ ही  देर  में  Physics के  सर  वापस  आये  और  कहा  "आगे से  ध्यान  रखना  क्लास  में  , होंगे  तेरे  पिताजी  इंजिनियर  नगर  परिषद्  में " |
                                तो  यह  था  मेरा  पहला  दिन  NPTN में | यह  बात  मुझे  आज  भी  याद  है  (ofcourse तभी तो लिख रहा हूँ) और  आज  भी  यह  बात  याद  कर  मैं  अपने  आप  पर  हँस   देता  हूँ ||



to be continued . . .


Friday, May 01, 2009

Kolkata Knight Riders - जीतने आये थे हार के जायेंगे उनमे से ही है हम मात जो खाए है (कोरबो लोरबो हारबो)




Kolkata knight riders, शाहरुख़ खान ने क्या-क्या सपने देखे थे की ये टीम सेमी-फायनल में कम-से-कम इस बार तो पहुँच ही जायगी |
पर वो अभी सबसे निचे याने आठवें पायदान पर चल रही है |
तो सुनिए शाहरुख़ का नया गाना -
कोरबो लोरबो हारबो

जीतने आये थे हार के जायेंगे
उनमे से ही है हम मात जो खायेंगे - २
too weak to win
too weak to win 
आम्ही कोलकाता we are ruled (by Buchanan and SRK)
कोरबो लोरबो हारबो रे
कोरबो लोरबो रे हारबो रे हारबो रे  
लडेंगे लडेंगे हारेंगे हार जायेंगे हारेंगे हारेंगे
सारा जहाँ आगे
हम तो चले पीछे
दुश्मन जो दिखे हमको 
हम तो दुम दिखा के भागे रे भागे
too weak to win
too weak to win
आम्ही कोलकाता we are ruled (by Buchanan and SRK) 

Thursday, April 30, 2009

गुस्सा - एक कमजोरी या ताकत





आज मैं आपसे मानव के एक स्वाभाव "गुस्से" के बारे में संभाषण करूँगा -
अक्सर सुनते है "गुस्सा एक कमजोरी है" लेकिन सच्चाई सुनिए "दुनिया में आजतक कहीं पर भी कोई बदलाव आया है, तभी आया है जब किसी को गुस्सा चढा है | "
इतिहास में इस के बारे में एक रोचक बात है -
जब अंग्रेजों ने गांधीजी को ट्रेन के कंपार्टमेंट से उठाकर बहार फेंक दिया | गांधीजी को बहुत बुरा लगा, गुस्सा आया, उन्होंने कहा,"तुमने मुझे इस कंपार्टमेंट से बहार फेंका है, मैं तुम्हें इस देश से उठाकर बहार फ़ेंक दूंगा |" क्या किया उन्होंने, उस गुस्से को एक संकल्प में बदल दिया और उनकी सबसे बड़ी कमजोरी (गुस्सा),उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गयी |
इस के बारे में एक और उदाहरण है मुंबई पर २६/११ को हुए आतंकवादी हमलों का -
२६ नवम्बर २००८ को कुछ पाकिस्तानी मुल्क के आतंकियों ने पूरी मुंबई को मानो २-३ दिन के लिए कब्जे में कर लिया हो | इस घटना से ना सिर्फ मुंबई बल्कि पूरा देश एकत्रित हुआ और भारत सरकार पर दबाव बनाया | पूरा देश इस घटना की निंदा करने लगा | नतीजा - भारत सरकार ने पाकिस्तानी सरकार पर आतंकियों के विरोध में कार्यवाही करने की धमकी दी और पकिस्तान इस पर कुछ तो कर ही रहा है | मैं ये नहीं कह रहा हूँ की यह सब सिर्फ गुस्से के वजह से हुआ पर गुस्से का उसमें अहम योगदान था | तो -
गुस्सा मानव के सबसे बड़ी ताकत है ,
अगर उसे सकारात्मक तरीके से लिया तो |

ऊपर लिखे विचार श्री.शिव खेड़ा (लेखक - जीत आपकी ) के है, सिर्फ मैंने उसमें २६/११ के हमलों का उदाहरण जोड़ा है

Tuesday, April 28, 2009

संता और बंता के चुटकुले


1.
संता (बंता से)- ओए बंता भाई एक बात बताओ, अगर नींद न आए तो क्या किया जाए?
बंता (संता से)- नींद का इंतजार करने से अच्छा है बंदा सो ही जाए।

2.
संता (बंता से)- नामुमकिन शब्द मेरे डिक्शनरी में नहीं है।
बंता (संता से)- तो पगले डिक्शनरी खरीदने से पहले देखना था ना, अब चिल्लाने का क्या फायदा।

3.

संता (बंता से)- बंता मैं तुम्हारे एटीएम का पासवर्ड जान गया हूं।
बंता (संता से)- अच्छा, जरा बताना क्या है मेरा पासवर्ड?
संता- चार स्टार है..
बंता- नहीं, मेरा पासवर्ड तो 2321 है।
4.
डाकू (संता से)- या तो जान दो या रुपया जितना तुम्हारे पास है।
संता (डाकू से)- नहीं जी तुम मेरी जान ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।
5.

संता (बंता से)- यार बचपन में मैं बीस मंजिली इमारत से गिर गया था।
बंता (संता से)- बच गया या मर गया?
संता- याद नहीं बहुत पुरानी बात है।
6.
संता रेल की पटरी पर सो गया।
बंता (संता से)- क्या कर रहे हो? ट्रेन आएगी तो मरोगे क्या?
संता (बंता से)-मेरे ऊपर से हवाई जहाज गुजर गया तो कुछ नहीं हुआ, ट्रेन क्या चीज है।
7.
जज (संता से)- तुम्हें कल सुबह 5 बजे फांसी दी जाएगी।
संता (जज से)- हां..हां..हां!
जज (संता से)- तुम हंस क्यों रहे हो?
संता (जज से)- मैं तो सुबह 8 बजे तक सोता हूं।
8.
संता भागता हुआ आता है और बंता से कहता है- बंता तुम्हारे घर में तालाब का पानी घुस गया है।
बंता (संता से)- ओए क्यों झूठ बोलता है, घर की चाबी तो मेरे पास है।
9.

संता (दुकानदार से)- कोई बढि़या कपड़ा दिखाइएं।
दुकानदार (संता से)- प्लेन में दिखाऊं?
संता- प्लेन में जाने की क्या जरूरत है, यही दिखाओ।.
10.
बंता (संता से)- ये चाकू क्यों उबाल रहे हो?
संता (बंता से)- आत्महत्या करने के लिए।
बंता- तो फिर उबालने की क्या जरूरत हैं?
संता- कही इंफेक्शन न हो जाए।

11.

संता को परीक्षा में किसी भी सवाल का जवाब नही आता था,
संता ने हर सवाल के नीचे /////////////// लाइन लगा दी और लिखा स्क्रैच करके जवाब पढ़ लेना।
12.

संता ने घर का दरवाजा उखाड़ा और कंधे पर रख के बाजार में ले गया, एक आदमी ने पूछा कहां जा रहे हो, क्या दरवाजा बेचना है?
संता- नही यार ताला खुलवाना है।

13.
फिल्म डायरेक्टर (संता से)- तुमको 100 फुट की ऊंचाई से स्विमिंग पूल में कूदना है।
संता- पर मुझे तैरना नही आता, मैं डूब जाऊंगा।
फिल्म डायरेक्टर- घबराओ नही स्विमिंग पूल में पानी नही है।
14.
संता (बंता से)- केक पर बल्ब क्यों लगाया?
बंता (संता से)- 60 मोमबत्तियों को लगाने में दिक्कत हो रही थी तो सोचा 60 वाट का बल्ब ही लगा दूं।

15.
नासा ने संता और बंता को चांद पर भेजा।
रॉकेट उड़ा मगर आधे रास्ते से वापस आया।
संता से पूछा गया तो वो बोला- आज अमावस है , चांद तो होगा ही नही ।

16.
संता- यार बंता मैंने एक चीज नोटिस की है।
बंता- अच्छा क्या?
संता- मैंने हमेशा नोट किया है कि जब रेलवे फाटक बंद होता है तो ट्रेन जरूर आती है।

17.
संता बाइक पर जा रहा था।
उसने रास्ते में खड़े बंता से पूछा आपको लिफ्ट चाहिये क्या।
बंता- नही हमारा घर तो ग्राउंड फ्लोर पर है।

18.
बॉस (संता से)- एक अच्छा शीशा लेकर आओ जिसमें मेरा चेहरा दिखायी दे।
संता- मैं सब दुकानों पर देख आया सब में मेरा चेहरा ही दिख रहा था।

19.
संता [बंता से]- बंता ये बताओ कि एप्पल और ऑरेंज में क्या अंतर होता है।
बंता [संता से]- आसान है, ऑरेंज का कलर ऑरेंज होता है जबकि एप्पल का कलर एप्पल नहीं होता।

20.
संता का गधा खो गया तो संता भगवान की प्रार्थना कर शुक्रिया अदा करने लगा।
बंता ने पूछा- तुम्हारा गधा खो गया और तुम भगवान को धन्यवाद दे रहे हो।
संता- मैं धन्यवाद इसलिए दे रहा हूं की अच्छा हुआ मैं उस पर नही बैठा हुआ था नही तो मैं भी खो जाता।

21.
संता पेड़ के ऊपर उलटा लटका हुआ था।
बंता- तू पेड़ पर क्यों लटका है।
संता- सर दर्द की गोली खायी थी, कहीं पेट में न चली जाये, इसलिये..

22.
संता (बंता से)- ओए बंते, तू दरवाजे पर इतनी हड़बड़ी में पेंट क्यों पोत रहा है?
बंता (संता से)- वो क्या है न कि पेंट कम है और मुझे डर है कि कही खत्म न हो जाए।

23.
संता (बंता से)- यार मुझे 1 हथौड़ा और कील चाहिए कम्प्यूटर के लिए।
बंता- मगर कम्प्यूटर में इनका क्या काम?
संता- ओह यार कम्प्यूटर में विंडो लगानी है।

24.
संता रोज भगवान से प्रार्थना करता था- हे भगवान मेरी लॉटरी लगा दे, हे भगवान मेरी लॉटरी लगा दे..
ग्यारह साल बाद भगवान को गुस्सा आ गया वो बोले अबे एक बारी टिकट तो खरीद लें।

25.
शर्मा जी (संता से)- संता जी आपको गर्मी लगती है तो क्या करते हो?
संता (शर्मा जी)- एसी के पास जाकर बैठ जाता हूं।
शर्मा जी- अगर फिर भी गर्मी लगे तो?
संता- तो एसी ऑन कर लेता हूं।

26.
ग्राहक - संता जी लस्सी में मक्खी है।
संता- ओए चुपकर, दिल बड़ा रख, ये नन्ही सी जान तेरी कितनी लस्सी पी जाएगी।

27.
अमेरिकन (संता से)- हमारे देश में वार हो गया।
संता- हमारे इंडिया में तो रोज वार होता है।
अमेरिकन- वो कैसे?
संता- सोमवार, मंगलवार, बुधवार....

28.
संता (बंता से)- यार, मेरी एक समस्या है।
बंता (संता से)- वो क्या?
संता- मुझे कभी-कभी बात करते वक्त आदमी नहीं दिखाई देता है।
बंता- ऐसा कब होता है?
संता- जब मैं फोन पर बात करता हूं तब।

29.
संता ट्रेन में चढ़ने लगा तो आकाशवाणी हुई- ये ट्रेन पटरी से उतर जाएगी, संता वही रुक गया। संता हवाई जहाज में चढ़ने लगा तो भविष्यवाणी हुई यह हवाई जहाज क्रेश हो जाएगा संता वहीं रुक गया।
संता बस में बैठने लगा तो आवाज आई- इसका एक्सीडेंट हो जाएगा।
संता- तुम कौन हो जी?
आवाज आई- भगवान
संता- जब मैं घोड़ी चढ़ रहा था तब तुम कहा थे।

30.
संता का सिर फट गया।
डॉक्टर (संता से)- ये कैसे हुआ?
संता (डॉक्टर से)- मैं पत्थर से कील ठोक रहा था, एक आदमी ने मुझसे कहा गधे कभी खोपड़ी का इस्तेमाल भी कर लिया कर!

31.
संता समुद्र में दही डाल रहा था।
बंता (संता से)- ये क्या कर रहे हो।
संता (बंता से)- लस्सी बना रहा हूं।
बंता- इसीलिए लोग हमारा मजाक उड़ाते है, इतनी लस्सी तेरा चाचा पियेगा।

32.
संता शीशे के सामने बैठ कर पढ़ रहा था। क्यों?
इसके 3 कारण है-
1. दोबारा दोहराना न पढ़े..
2. अपने ऊपर नजर रहे..
और
3. उसे किसी के साथ पढ़ना अच्छा लगता है.

33.
संता (बंता से)- यार जेल को हिंदी में हवालात क्यों कहते हैं?
बंता (संता से)- क्योंकि जेल में खाने को हवा और लात जो मिलते हैं।

34.
संता (बंता से)- ट्रेन में यार रात भर नींद नही आयी.. ऊपर की सीट मिली थी!
बंता (संता से)- तो सीट बदल लेते!
संता- किससे बदलता, नीचे की सीट पर कोई नही था....।

35.
बारिश के दिनों में संता छतरी लेकर बाहर गया, उसकी छतरी में बड़ा सा छेद था।
संता (बंता से)- ओए, तेरी छतरी में छेद क्यों है?
बंता- अरे, ये छेद मैंने ही किया है, ताकि बारिश बंद होने पर मुझे पता चल सके।

36.
संता (दुकानदार से)- तुमने मुझे धोखा दिया।
दुकानदार (बंता से)- वो कैसे?
बंता- तुमने कहा था यह रेडियो अमेरिका का बना है, मगर जब मैंने इसे चलाया तब इसमें से आवाज आई,.. यह है ऑल इंडिया रेडियो!

37.
संता सिंह की नई नौकरी लगी।
पहले दिन संता ने बहुत देर तक काम किया। देर रात तक उसकी टेबल से खटर-पटर की आवाज आती रही।
संता का बॉस उससे बड़ा खुश हुआ। अगले दिन बॉस ने संता को अपने केबिन में बुलाकर पूछा- कल तुमने देर रात तक क्या किया?
संता- कुछ नहीं सर, दरअसल की बोर्ड के एल्फाबेटस क्रम में नही थे...उन्हीं को ठीक कर रहा था।

38.
संता मुंबई घूमने गया। गेटवे ऑफ इंडिया पर खड़े होकर वह कबूतर देखने लगा।
वहां पुलिस की वर्दी में एक ठग ने उसे टोका। क्या तुम्हें पता नही है कि यहां कबूतर देखने के भी पैसे लगते हैं। कितने कबूतर देखें?
संता ने जवाब दिया- जी पंद्रह।
ठग संता से पंद्रह रुपए लेकर चलता बना। वापस लौटकर संता सिंह ने अपनी पत्नी से कहा- मैंने मुंबई में एक पुलिस वाले को ठग लिया।
पत्नी (संता से)- कैसे?
संता- मैंने वहां पच्चीस कबूतर देखे लेकिन रुपए पंद्रह कबूतर के ही दिए।
39.
बंता (संता से)- जब तुम कार चलाते वक्त मोड़ पर तेजी से टर्न लेते हो तो मेरी सांस ही रुक जाती है? तुम ही बताओ मैं क्या करूं?
संता (बंता से)- यार इतना घबराते क्यों हो। तुम भी मेरी तरह आंखे बंद कर लिया करो! बस..

40.
संता डाकू (बंता से)- सुन या तो तू अपनी जान देगा, या फिर वह सारा रुपया जो पोटली में दबाकर ले जा रहा है।
बंता (संता डाकू से)- नहीं जी, तुम मेरी जान ही ले लो, रुपया तो मैंने बुढ़ापे के लिए रख छोड़ा है।

41.
संता को तीन बम मिले उसने बंता को यह बात बतायी और बंता के साथ उन्हें पुलिस को देने चला गया।
बंता - अगर कोई बम रास्ते में ही फट गया तो..
संता- झूठ बोल देंगे की दो ही मिले थे!